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संस्कृत वर्णमाला: स्वर और व्यंजन
Understand
भाषा की सबसे छोटी ध्वनि 'वर्ण' (अक्षर) है। संस्कृत में वर्ण दो प्रकार के हैं — स्वर (अच्), जो बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता के बोले जाते हैं, और व्यंजन (हल्), जिन्हें बोलने के लिए स्वर की सहायता चाहिए।
| वर्ग | वर्ण | संख्या |
|---|---|---|
| मूल स्वर (ह्रस्व) | अ, इ, उ, ऋ, ऌ | 5 |
| संयुक्त स्वर | ए, ओ, ऐ, औ | 4 |
| स्पर्श व्यंजन | क से म तक (कवर्ग, चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, पवर्ग) | 25 |
| अन्तःस्थ | य, र, ल, व | 4 |
| ऊष्म | श, ष, स, ह | 4 |
| अयोगवाह | अनुस्वार (ं), विसर्ग (ः) | — |
Rule
उच्चारण के समय के आधार पर स्वर तीन प्रकार के हैं: ह्रस्व (1 मात्रा), दीर्घ (2 मात्रा), प्लुत (3 मात्रा — दूर से पुकारने, गाने या रोने में; लिखते समय स्वर के आगे 3 का अंक लगाते हैं)।
ऌ का दीर्घ रूप नहीं होता; ए, ऐ, ओ, औ का ह्रस्व रूप नहीं होता।
हर वर्ग का पाँचवाँ वर्ण (ङ, ञ, ण, न, म) अनुनासिक कहलाता है।
Example
'कमल' में क् + अ + म् + अ + ल् + अ — तीन व्यंजन और तीन स्वर हैं। व्यंजन के साथ लगा 'अ' अलग से लिखा नहीं जाता, पर बोला जाता है।
Common mistake
'क्ष, त्र, ज्ञ' को अलग वर्ण मान लेना। ये संयुक्त व्यंजन हैं: क्ष = क् + ष, त्र = त् + र, ज्ञ = ज् + ञ।
Check yourself
'ह' व्यंजन किस समूह में आता है — अन्तःस्थ या ऊष्म?