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विभक्ति और कारक
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संस्कृत में संज्ञा/सर्वनाम के रूप 7 विभक्तियों और 3 वचनों (एक, द्वि, बहु) में चलते हैं — 21 रूप, साथ में सम्बोधन। क्रिया से जिसका सीधा सम्बन्ध हो, वह कारक है। कारक 6 हैं; सम्बन्ध (षष्ठी) कारक नहीं माना जाता, क्योंकि उसका सीधा सम्बन्ध क्रिया से नहीं होता।
| कारक | विभक्ति | हिन्दी चिह्न | सूत्र/पहचान |
|---|---|---|---|
| कर्ता | प्रथमा | ने, — | स्वतन्त्रः कर्ता (काम करने वाला) |
| कर्म | द्वितीया | को | कर्तुरीप्सिततमं कर्म |
| करण | तृतीया | से, के द्वारा | साधकतमं करणम् |
| सम्प्रदान | चतुर्थी | के लिए, को (देना) | कर्मणा यमभिप्रैति स सम्प्रदानम् |
| अपादान | पञ्चमी | से (अलग होना) | ध्रुवमपायेऽपादानम् |
| (सम्बन्ध) | षष्ठी | का, के, की | कारक नहीं |
| अधिकरण | सप्तमी | में, पर | आधारोऽधिकरणम् |
Rule
भीत्रार्थानां भयहेतुः — डरने/बचाने के अर्थ वाली धातुओं के साथ भय का कारण पञ्चमी में: बालकः सिंहात् बिभेति।
रुच्यर्थानां प्रीयमाणः — 'रुच्' (अच्छा लगना) के साथ जिसे अच्छा लगे, वह चतुर्थी में: बालकाय मोदकं रोचते।
क्रुध्, द्रुह्, ईर्ष्य, असूय के साथ जिस पर क्रोध हो, वह चतुर्थी में: पिता पुत्राय क्रुध्यति।
Example
'वृक्षात् पत्राणि पतन्ति' — पत्ते वृक्ष से अलग हो रहे हैं → अपादान → पञ्चमी (वृक्षात्)।
Common mistake
हिन्दी के 'से' को हमेशा तृतीया मान लेना। साधन हो तो तृतीया (कलमेन लिखति), अलग होना या डर हो तो पञ्चमी (सिंहात् बिभेति)।
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'मह्यं दुग्धं रोचते' में 'मह्यम्' कौन-सी विभक्ति है और क्यों?