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समास क्या है: प्रधानता से पहचान
Understand
दो या अधिक पद मिलकर, बीच की विभक्ति या जोड़ने वाला शब्द हटाकर, एक पद बन जाएँ — यह समास है ('समसनं समासः' = संक्षेप)। समस्त पद को वापस अलग करके अर्थ दिखाना 'विग्रह' कहलाता है। पहला पद पूर्वपद, दूसरा उत्तरपद है।
| समास | प्रधान पद | विग्रह की पहचान |
|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पूर्वपद (अव्यय) | पहला पद उप, यथा, प्रति, अनु, निर्… ; पूरा पद अव्यय |
| तत्पुरुष | उत्तरपद | पूर्वपद में द्वितीया से सप्तमी तक कोई विभक्ति |
| कर्मधारय | उत्तरपद | विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय ('इव') |
| द्विगु | उत्तरपद | पहला पद संख्या + 'समाहारः' |
| द्वन्द्व | दोनों पद | बीच में 'च' (और) |
| बहुव्रीहि | अन्य पद | 'यस्य सः / येन सः' — कोई तीसरा अर्थ |
Rule
संस्कृत व्याकरण में मुख्य भेद चार माने जाते हैं — अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि; कर्मधारय और द्विगु तत्पुरुष के ही भेद हैं।
Remember
विग्रह में आने वाला संकेत-शब्द देखें: 'च' → द्वन्द्व; 'समाहारः' + संख्या → द्विगु; 'यस्य सः' → बहुव्रीहि; 'इव' → उपमान कर्मधारय; 'समीपम्/अनतिक्रम्य' → अव्ययीभाव।
Common mistake
कर्मधारय और द्विगु को तत्पुरुष से बिल्कुल अलग समझना। दोनों तत्पुरुष के ही उपभेद हैं; प्रश्न में जो सबसे सटीक नाम हो वही चुनें।
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जिस समास में दोनों पद प्रधान हों, उसे क्या कहते हैं?