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क्त्वा और ल्यप् ('करके')
Understand
प्रत्यय धातु या शब्द के बाद जुड़कर नया शब्द बनाते हैं। धातु से लगने वाले प्रत्यय 'कृत्', शब्द से लगने वाले 'तद्धित' और स्त्रीलिंग बनाने वाले 'स्त्री प्रत्यय' कहलाते हैं। प्रत्यय का कुछ भाग (अनुबन्ध) हट जाता है: क्त्वा → त्वा, ल्यप् → य।
Rule
क्त्वा (त्वा): 'करके' अर्थ में, जब धातु से पहले उपसर्ग न हो।
ल्यप् (य): समासेऽनञ्पूर्वे क्त्वो ल्यप् — धातु से पहले उपसर्ग हो तो क्त्वा के स्थान पर ल्यप्।
पहले 'न' (नञ्) हो तो ल्यप् नहीं होता: न + कृत्वा = अकृत्वा।
| धातु | क्त्वा | उपसर्ग + ल्यप् |
|---|---|---|
| पठ् | पठित्वा | — |
| गम् | गत्वा | आ + गम् → आगम्य / आगत्य |
| कृ | कृत्वा | उप + कृ → उपकृत्य |
| दृश् | दृष्ट्वा | सम् + दृश् → सन्दृश्य |
| दा | दत्त्वा | आ + दा → आदाय |
| नम् | नत्वा | प्र + नम् → प्रणम्य |
| हस् | हसित्वा | वि + हस् → विहस्य |
| विश् | विष्ट्वा | उप + विश् → उपविश्य |
| पा | पीत्वा | — |
| स्था | स्थित्वा | — |
| श्रु | श्रुत्वा | — |
| भू | भूत्वा | — |
Example
'प्र + नम् + ल्यप्' = प्रणम्य — उपसर्ग है, अतः ल्यप् (य); 'प्र' के 'र' के कारण न → ण।
Common mistake
उपसर्ग होने पर भी 'त्वा' लगाना ('प्रनत्वा', 'आगत्वा')। उपसर्ग दिखे तो केवल ल्यप् (य) वाला रूप शुद्ध है।
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