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लकार, पुरुष और वचन
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संस्कृत में काल और भाव बताने वाले 10 लकार हैं। विद्यालय स्तर पर पाँच मुख्य हैं। क्रिया का रूप कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार चलता है — इसलिए हर लकार में 9 रूप (3 पुरुष × 3 वचन) होते हैं।
| लकार | अर्थ | संकेत शब्द | भू (प्रथम पुरुष एकवचन) |
|---|---|---|---|
| लट् | वर्तमान काल | अधुना, अद्य | भवति |
| लङ् | भूतकाल (अनद्यतन) | ह्यः | अभवत् |
| लृट् | भविष्यत् काल | श्वः, परश्वः | भविष्यति |
| लोट् | आज्ञा, प्रार्थना, आशीर्वाद | — | भवतु |
| विधिलिङ् | चाहिए (विधि), सम्भावना | — | भवेत् |
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम (अन्य) | सः, सा, बालकः, भवान् | तौ, ते | ते, ताः |
| मध्यम | त्वम् | युवाम् | यूयम् |
| उत्तम | अहम् | आवाम् | वयम् |
Remember
'भवान्/भवती' (आप) अर्थ में मध्यम लगते हैं, पर इनके साथ क्रिया प्रथम पुरुष की होती है: भवान् पठति।
Common mistake
हिन्दी के क्रम से उत्तम पुरुष को 'प्रथम' समझ लेना। संस्कृत में प्रथम पुरुष = वह/वे; उत्तम पुरुष = मैं/हम।
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'यूयं विद्यालयं ___' में गम् लट् का कौन-सा रूप आएगा?