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समास का परिचय: समस्त पद, विग्रह और प्रधान पद
Understand
दो या अधिक शब्दों को उनके बीच की विभक्ति या योजक शब्द हटाकर छोटा करना समास है। इससे बना नया शब्द समस्त पद (सामासिक पद) है। पहला पद पूर्वपद और दूसरा उत्तरपद कहलाता है। समस्त पद को फिर से तोड़कर उनका सम्बन्ध स्पष्ट करना समास-विग्रह है।
| समास | प्रधान पद | विग्रह में संकेत | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पूर्वपद (प्रायः अव्यय) | अनुसार, भर, प्रत्येक, तक | यथाशक्ति, प्रतिदिन |
| तत्पुरुष | उत्तरपद | कारक-चिह्न (को, से, के लिए, का, में…) | राजपुत्र, जलमग्न |
| कर्मधारय | उत्तरपद | है जो / के समान | नीलकमल, घनश्याम |
| द्विगु | उत्तरपद | संख्या + समूह/समाहार | चौराहा, त्रिभुवन |
| द्वन्द्व | दोनों पद | और, या, अथवा | माता-पिता, भला-बुरा |
| बहुव्रीहि | कोई पद नहीं (तीसरा अर्थ) | है जिसका/जिसके… अर्थात् … | दशानन, लम्बोदर |
Rule
सन्धि वर्णों का मेल है (विद्या + आलय), समास शब्दों का मेल है (विद्या के लिए आलय)। सन्धि तोड़ना सन्धि-विच्छेद, समास तोड़ना समास-विग्रह।
Remember
प्रधान-पद का सूत्र: पहला पद प्रधान → अव्ययीभाव; दूसरा → तत्पुरुष (कर्मधारय, द्विगु इसके उपभेद); दोनों → द्वन्द्व; कोई नहीं → बहुव्रीहि।
Common mistake
सन्धि-विच्छेद और समास-विग्रह को एक मान लेना — विग्रह में विभक्ति या योजक शब्द लिखे जाते हैं, केवल वर्ण नहीं तोड़े जाते।
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किस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता?