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काल-विभाजन और नामकरण
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हिन्दी साहित्य के इतिहास को चार कालों में बाँटने वाला सबसे प्रचलित विभाजन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के ग्रन्थ 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' (1929) से आया है। शुक्लजी ने हर काल का नाम उस समय की प्रमुख प्रवृत्ति के आधार पर रखा।
| काल | शुक्लजी का नाम | समय (विक्रम संवत्) | प्रमुख प्रवृत्ति |
|---|---|---|---|
| आदिकाल | वीरगाथा काल | 1050 – 1375 | वीरता-प्रधान रासो काव्य |
| पूर्व मध्यकाल | भक्तिकाल | 1375 – 1700 | निर्गुण और सगुण भक्ति |
| उत्तर मध्यकाल | रीतिकाल | 1700 – 1900 | लक्षण-ग्रन्थ, शृंगार |
| आधुनिक काल | गद्यकाल | 1900 से आगे | गद्य विधाओं का विकास |
Rule
आदिकाल के दूसरे नाम: आदिकाल (हजारीप्रसाद द्विवेदी), सिद्ध-सामन्त काल (राहुल सांकृत्यायन), बीजवपन काल (महावीरप्रसाद द्विवेदी), चारण काल (रामकुमार वर्मा)
रीतिकाल के दूसरे नाम: अलंकृत काल (मिश्रबन्धु), शृंगार काल (विश्वनाथप्रसाद मिश्र)
भक्तिकाल = हिन्दी साहित्य का 'स्वर्ण युग' (कबीर, जायसी, सूर, तुलसी)
हिन्दी साहित्य का पहला इतिहास फ़्रेंच विद्वान गार्सा द तासी ने लिखा माना जाता है
Remember
शुक्लजी का क्रम: वीरगाथा → पूर्व मध्य (भक्ति) → उत्तर मध्य (रीति) → गद्य। 'पूर्व' पहले आता है, इसलिए भक्ति; 'उत्तर' बाद में, इसलिए रीति।
Common mistake
'उत्तर मध्यकाल' को भक्तिकाल समझ लेना। उत्तर मध्यकाल = रीतिकाल; पूर्व मध्यकाल = भक्तिकाल।
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शुक्लजी ने आधुनिक काल को क्या नाम दिया?